जमीन में इनवेस्टमेंट
जमीन में इनवेस्टमेंट करना लंबी अवधि में फायदे का सौदा साबित होता है. इसलिए इसमें कम से कम 5-10 साल बाद ही रिटर्न के बारे में सोचना चाहिए.जमीन कहीं भी खरीदें उससे पहले उस इलाके और जमीन की कानूनी स्थिति के बारे में जांच-पड़ताल न कर लें. यह सुरक्षा के लिहाज से सही रहता है. किसी हाउसिंग स्कीम के पास जमीन लेनी हो, तो अतिरिक्त सावधानी बरतने की जरूरत पड़ती है, क्योंकि उस स्थिति में हाउसिंग स्कीम के साथ जुड़े सारे नियम-कायदों को भी मानना पड़ता है.
जमीन खरीदनी है, बस यह ही सोचकर कोई भी जमीन न खरीद डालें. इसके उलट, जमीन से पहले उसकी लोकेशन पर भी खास ध्यान दें. क्या जमीन ऐसी जगह तो नहीं है जहां बरसात में पानी भर जाता हो. जगह की मेन रोड से कनेक्टिविटी भी अहम है. बिजली-पानी के हालात भी देख लें। हो सकता है कि संबंधित जगह अभी ज्यादा विकसित न हो या वहां और विकास की संभावना हो. ऐसे में इलाके के डेवलेपमेंट प्लान के बारे में लोकल अथॉरिटी से मालूम कर सकते हैं. कोई डील फाइनल करेंगे तो सरकार को कर भी चुकाना ही पड़ेगा. इसलिए प्लॉट लेने से पहले इस बारे में जानकारी जुटा लें कि आपको कौन-कौन से टैक्स देने होंगे. एग्रीकल्चरल लैंड यानी खेती की जमीन कम कीमत में मिलेगी और उस पर कम टैक्स देना होगा. ज
मीन लेने से पहले लोकल अथॉरिटी से पता कर लें कि उस पर कर्मशल और रेजिडेंशल निर्माण की अनुमति है या नहीं? खेती की जमीन पर बड़ी बिल्डिंग नहीं बनाई जा सकतीं. ऐसी कोई जमीन खरीदने से पहलें जांच कर लें कि क्या उसे बाद में कंस्ट्रक्शन मोड में बदला जा सकता है या नहीं? यह भी पता कर लें कि उस लोकेशन पर कोई एसईजेड या विकास के किसी और काम की योजना तो नहीं बनाई जा रही.
प्रॉपर्टी लेने का एक मकसद इनवेस्टमेंट भी होता है. आमतौर पर प्रॉपर्टी में इनवेस्टमेंट अच्छा-खासा रिटर्न देकर जाता है. कंस्ट्रक्टड प्रॉपर्टी की कीमतें बढ़ाने में उसकी कंस्ट्रक्शन और फिनिशिंग क्वॉलिटी का भी हाथ होता है. प्लॉट की कीमत उसकी लोकेशन पर खासतौर पर डिपेंड करती है. अगर किसी लोकेशन के आसपास देर-सवेर मल्टीप्लेक्स, ऑफिस ब्लॉक, शॉपिंग कॉम्प्लेक्स आदि बनने के आसार हों, तो आपके प्लॉट की कीमतें बढ़नी लगभग तय हैं. अगर ऐसा नहीं होता और आसपास की जगहों पर बिजली-पानी की परेशानी भी रहती है, तो प्लॉट की कीमतों के बढ़ने की उम्मीद नहीं की जा सकती.
और हां, यह भी सुनिश्चित कर लें कि जिस व्यक्ति से आप जमीन खरीद रहे हैं वही उस जमीन का असली मालिक है या नहीं. जमीन अगर खेती की है तो यह भू-अभिलेख से पता चल सकता है. इस तरह की जमीन की रजिस्ट्री के बाद दाखिल खारिज की प्रक्रिया भी करवा लें जिसके बाद भू-अभिलेख में जमीन के स्वामी के रूप में आपका नाम दर्ज हो जाएगा.